सड़कों पर भरे थे अथाह जाम फिर शांत होकर सोयीं वो गलियाँ, वो धाम बिना हेलमेट के चलाते थे जो बाइक फ़ेस शील्ड्ज़ का उन्मे देखा गया एक स्पाइक एक-एक रुपये के लिए मोल-भाव करती जो महिला उसके जीवन ने भी देखा ऑनलाइन ख़रीदारी का सिलसिला खुले में शौच करता था जो आदमी भीतर तेज़ क़दमों से टॉलेट पेपर के लिए करता दिखा चहलक़दमी जो थूकने में समझते थे शान आज सफ़ाई करने में करते हैं मान पान-मसाला, गुटका, सिगरेट से था गहरा नाता गिलोय, आमला, हल्दी से हो गया है वास्ता मोबाइल फ़ोन पे बरसती परिवार~विद्यालय की टीम आज कक्षा हो गयी है बस इसके अधीन Offices, college or be it recipes galore WFH is the trend and has opened unlimited doors विवाह सादगी भरे सम्पन्न हुए जन्मदिन जाने कहाँ लुप्त जुटे मनुष्य की ज़रूरतें सीमित हुई किटी पार्टी, शॉपिंग, सिनमा सबकी विकृति हुई वाइरस फिर भी फैलता गया चपेटें में देश को लेता गया देश के लिए सिर्फ़ एक गणना परिवारों को निशब्द करता गया अन्लॉक की प्रक्रिया शुरू हुई ‘हम तो हैं राजा’ गूँज और सक्रिय हुई यह वाइरस हमारा बिगड़ क्या सकता है यह सोच और प्रबल और निर्भय हुई हे मेर...